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निसंतान औरतो को कैंसर का खतरा सबसे ज्यादा

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Women's Health and Pregnancy

संतान का न होना वैसे तो किसी स्त्री के लिए अपने-आपमें एक समस्या है ही, इसके चलते कई दूसरी समस्याएं भी हो सकती हैं। विश्व स्तर पर हुए लंबे शोध के बाद यह परिणाम सामने आया कि नि:संतान स्ति्रयां दो प्रकार की खतरनाक बीमारियों से ग्रस्त हो सकती हैं, पहली ब्रेस्ट कैंसर और दूसरे ओवरी का कैंसर। विशेषज्ञों का कहना है कि जो स्ति्रयां मां बनने का सुख नहीं उठा पातीं, उन्हें इस खतरे की आशंका अधिक रहती है। इस तरह के कैंसर के लिए एस्ट्रोजन हार्मोन जिम्मेदार होता है। नि:संतान स्ति्रयों के भीतर एस्ट्रोजन का निर्माण ज्यादा होता है। इस हार्मोन और कैंसर के बीच गठबंधन होने के कारण ही नि:संतान स्ति्रयां इसकी शिकार अधिक होती हैं। फोर्टिस अस्पताल की गाइनेकोलॉजिस्ट डॉ. शिवानी सचदेव गौड़ का कहना है कि इससे बचने के लिए 40 साल के बाद हर स्त्री को अपना अल्ट्रासाउंड और मेमोग्राफी जरूर करा लेनी चाहिए।

बचें बोतलबंद पानी से  

आज ऐसे लोगों की कमी नहीं जो सरकारी पेयजल की सप्लाई के बाद भी क्वालिटी कांशियस होने के कारण बोतलबंद पानी लेते हैं या घर पर वॉटर फिल्टर या प्यूरीफायर लगाना पसंद करते हैं। इससे पानी के शोधन के बाद उसमें जो बचे-खुचे मिनरल्स रह जाते हैं वे भी साफ हो जाते हैं। एक्सपर्ट का मानना है कि भले ही बोतलबंद पानी में कैंसरकारी तत्व न हों, लेकिन इसमें मैग्नीशियम न के बराबर रह जाता है। शरीर की सैकड़ों क्रियाओं में मैग्नीशियम प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तरीके से रोल निभाता है। जैसे दिल की गति को सामान्य बनाने में सहयोग करता है, उच्चरक्तचाप को कम करता है, इंसुलिन की मात्रा को नियंत्रित करता है तथा 300 से ज्यादा एंजाइमों को नियमित करता है। इसलिए बेहतर स्वास्थ्य केलिए शरीर में मैग्नीशियम का लेवल बरकरार रखना बहुत जरूरी है। इसीलिए विशेषज्ञ कहते हैं मिनरल्स रहित पानी वाले इलाकों में, कठोर जल यानी मिनरल्स युक्त पानी वाले इलाकों की तुलना में अचानक होने वाली मृत्यु दर में दस प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है। यदि स्वास्थ्य की दृष्टि से बोतलबंद पानी पी रहे हैं तो ध्यान रखें।


फैटी एसिड खाएं  

खाने से मिले फैट्स जरूरी हैं, लेकिन वे स्वस्थ स्त्रोतों से मिलें तभी। मछली, सनफ्लॉवर, सोया और कॉर्न पोलीअनसैचुरेटेड फैट के बेहतरीन स्त्रोत हैं। कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन की तरह मानव शरीर के लिए फैट भी महत्वपूर्ण है। प्रतिदिन के मेटाबॉलिज्म के लिए भी थोड़ा फैट चाहिए।

हमारे प्रतिदिन के भोजन में कुल कैलरी का 10 प्रतिशत सैचुरेटेड फैट, कोलेस्ट्रॉल प्रतिदिन 300 ग्राम से कम, ट्रांस फैट एकदम नहीं होना चाहिए। हमारा शरीर जितनी ज्यादा कैलरीज लेता है

वह सैचुरेटेड फैट में बदल जाती है।


स्वस्थ जीवनशैली के लिए 


कुकिंग ऑयल का चयन सावधानी से करें, सनफ्लॉवर ऑयल लें। 

अतिरिक्त घी खाने से बचें। 

तेल को दुबारा प्रयोग करने से बचें। 

बाजार में तले खाद्य से दूर रहें क्योंकि इनमें हाइड्रोजेनेटेड फैट होता है। 

वनस्पति घी का इस्तेमाल न करें। 

मांस और मछली का विकल्प खाने में शामिल करें। ओमेगा 3 फैटी एसिड फिश में होता है जो दिल के लिए बेहतरीन हैं। 

एक दिन में एक अंडे के योक से ज्यादा न खाएं। 

एल्कोहॉल, कॉफी, चाय और कोल्डड्रिंक्स से दूर रहें।

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