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Diabetes: Type I

 इस प्रकार के डायबिटीज में पैन्क्रियाज की बीटा कोशिकाएं पूरी तरह से नष्ट हो जाती हैं और इस तरह इंसु‍लिन का बनना सम्भव नहीं होता है। यह जनेटिक, ऑटो-इम्‍यून एवं कुछ वायरल संक्रमण के कारण होता है, इसके कारण ही बचपन में ही बीटा कोशिकाएं पूरी तरह से नष्ट हो जाती हैं। यह बीमारी सामान्‍यतया 12 से 25 साल से कम अवस्था में देखने को मिलती है। स्‍वीडन और फिनलैण्ड में टाइप 1 डायबिटीज का प्रभाव अधिक है। स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय के अनुसार भारत में 1% से 2% मामलों में ही टाइप 1 डा‍यबिटीज की समस्‍या होती है।

 वैसे तो डायबिटीज के 6 प्रकार है लेकिन 80 से 90 प्रतिशत लोग डायबिटीज के दो प्रकार से सबसे ज्यादा पीड़ित होते है. यह है – type 1 diabetes  और type 2 diabetes

Type 1 diabetes – इस प्रकार की डायबिटीज ज्यादातर छोटे बच्चो या 20 साल के निचे तक के लोगो में पाई जाती है. जब हमारी Pancreas (अग्न्याशय) इंसुलिन नहीं बना पाती तब टाइप 1 डायबिटीज की शुरुआत होती है. इसमें रोगी को अपने खून में ग्लूकोज का लेवल नार्मल बनाय रखने के लिए समय समय पर इंसुलिन के इंजेक्शन लेने पड़ते है
 
Type 2 diabetes – टाइप 2 डायबिटीज में शरीर के अन्दर इन्सुलिन का निर्माण तो होता है पर वह शरीर की आवश्यकता के अनुसार नहीं होता. दुनियां भर में सबसे ज्यादा लोग इसी प्रकार के मधुमेह से पीड़ित है. यह अनुवांशिक भी हो सकती है और मोटापे के कारण भी.

डायबिटीज के अनेक लक्ष्ण है जिसमे से निचे दिए गए प्रमुख है. अगर किसी इंसान को इनमे से ज्यादातर लक्षण दिखाई दे तो तुरतं जांच करवानी चाहिए.

बार-बार पेशाब का आना
आँखों की रौशनी कम होना
ज्यादा प्यास लगना
कमजोरी महसूस होना
कोई भी चोट या जख्म देरी से भरना
रोगी के हाथों, पैरों और गुप्तांगों पर खुजली वाले जख्म
स्कीन पर बार बार इन्फेक्शन होना और बार-बर फोड़े-फुँसियाँ निकलना
भूख ज्यादा लगना
ज्यादा खाना खाने के बाद भी रोगी का भार कम होना
चक्कर आना और हृदय गति अनियमित होने का खतरा
किडनी खराब होना

Genetic (अनुवांशिक) – डायबिटीज एक अनुवांशिक रोग है यानी अगर किसी के माता पिता को डायबिटीज है तो उनके बच्चो हो भी मधुमेह होने की सम्भावना ज्यादा होती है.
 
खान पान और मोटापा – जंक फ़ूड या फ़ास्ट फ़ूड खाने वाले लोगो में मधुमेह के सम्भावना ज्यादा पाई जाती है. क्योकि इस तरह के खाने में वसा (fat) ज्यादा पाया जाता है जिससे शरीर में कैलोरीज की मात्रा जरुरत से ज्यादा बढ़ जाती है और मोटापा बढ़ता है जिसके कारण इन्सुलिन उस मात्रा में नहीं बन पाता जिससे शरीर में शुगर लेवल में बढ़ोतरी होती है.
 
डायबिटीज के अन्य कारण है –

ज्यादा शारीरिक क्षम न करना
मानसिक तनाव और डिप्रेशन
गर्भावस्था
ज्यादा दवाइयों के सेवन
ज्यादा चाय, दूध, कोल्ड ड्रिंक्स और चीनी वाले खाने के सेवन
धूम्रपान और तम्बाकू का सेवन
 

Diabetes का एक कारण चिंता या तनाव भी है इसलिए जितना हो सके उतना तनाव न ले. इसके लिए आप एक्सरसाइज या मैडिटेशन भी कर सकते है. जितना हो सके उतना physical work करे. अच्छी नींद ले. साथ ही अपने वजन को कण्ट्रोल में रखे.
जितना हो सके उतनी balance diet (हरी सब्जियां, अनाज, दाले) ले. फ़ास्ट फ़ूड, घी तेल से बनी चीजे, ज्यादा मीठी चीजे या fat वाले भोजन काफी कम खाए. साथ ही मीठे फलो और जूसो से भी परहेज करे. इसमें आम, लीची, केला, अंगूर, चीकू, शरीफा शामिल है जिन्हें न खाए.
डायबिटीज के रोगियों को कपालभाति प्राणायाम (Kapalbhati pranayama), अनुलोम विलोम और मंडूकासन करने की सलाह दी जाती है.
अगर आप डायबिटीज से पीड़ित है तो अपने पैरो की हिफाजत करे. चोट से बचाव के लिए नंगे पैर न चले. साथ ही अगर चोट लगे तो नजरंदाज बिलकुल न करे क्योकि ऐसी स्थिति में इन्फेक्शन फैलने की सम्भावना ज्यादा होती है.
डायबिटीज के रोगी नियमित रूप से अपने शुगर लेवल की जांच करवाए. साथ ही पैरो में सुन्नपन आने को चेतावनी के रूप में ले.
बिना किसी डॉक्टर की सलाह के कोई भी दवाई न ले.
दोस्तों हेल्थ ही असली वेल्थ है इसलिए हमेशा अपनी सेहत का ध्यान रखे और स्वस्थ्य रहे


Note – यह जानकारी डायबिटीज के प्रति आपके ज्ञान को बढ़ाने के लिए दी गई है. बिना चिकित्सक की परामर्श के कोई भी कदम न उठाये. साथ ही अगर आपको इस लेख में कोई त्रुटी नजर आये या आप कुछ इसमें जोड़ना चाहते है तो कृपया हमे सूचित करे.

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