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दांतों मेें ख्‍ााना फसें तो दें ध्यान |

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दांतों में खाना फंसना आम समस्‍या है। लेकिन प्रकृति ने हमारे दांतों, जीभ, गालों की संरचना एवं कार्य- प्रणाली ऐसी बनाई है कि दांतों के बीच सामान्यत : कुछ भी खाद्य पदार्थ फंस ही नहीं सकता। जीभ व गालों के लगातार दांतों पर होने बाले घर्षण से हमारे दांतों की सफाई होती रहती है ।


अगर कभी - कभार कुछ फंस भी जाता है तो वह गार्गल करने मात्र से ही निकल जाता है। लेकिन अगर किसी व्यक्ति के किसी विशेष दांत अथवा दांतों में ही खाना फंस रहा है तो समझ लीजिए की कहीं न कहीं गड़बड़ है इसके लिए आप दंत-चिकित्सक से परामर्श लें। आम तौर पर देखा गया है कि बहुत से लोग टुथपिक या दिया-सिलाई की तीली से फंसे पदार्थों कौ कुरेदते रहते हैं। यह समस्या का समाधान नहीं है। कुछ लोग अपने आप ही इस समस्या से समाधान के लिए इंटर-डेंटल ब्रश यानी दो दांतों के बीच में इस्तेमाल किए जाने वाले ब्रश को यूज़ करना शुरु कर देते है ।

अपने ही तरीके से समाधान ढूंढने का सीधा -सीधा मतलब है दन्त रोगों को बढ़ावा देना।

दांतों में खाना फंसने के कारण
दन्त -छिद्र (दांतों में कैविटीज)

मसूड़ों की सुजन (पायरिया)


दन्त-छिद्रों और पायरिया का समुचित उपचार होने के बाद इस समस्या का समाधान सम्भव है| जहां तक मसूड़ों की सर्जरी के बाद दांतो में फसने की बात है ,यह आम तौर पर कुछ ही सप्ताह में ठीक हो जाता है |


ध्यान रखें :-

1.कई बार जब कोई मरीज दन्त-चिकित्सक के पास जाकर दांत में कुछ फंसने (उदाहरण के तौर पर कोई रेशेदार सब्जी जैसे पालक ,साग ,बंद-गोभी,मैथीइत्यादि)मात्र से ही दंत -चिकित्सक को यह संकेत मिल जाता है कि दांत में या अमुक दो दांतो के बीच कुछ गड़बड़ है |चाहे मरीज को अपने दांत देखने में सब कुछ ठीक ठाक ही लगे, लेकिन दंत -छिद्र अथवा मसूड़ों कि तकलीफ कि पुष्टि कि जाती है|


2.जहां कहीं भी मुँह में दांतो के बीच या कहीं भी खाना फंसेगा, स्वाभाविक है कि यह वहाँ पर सड़ने के बाद स्मेल तो पैदा करेगा ही| साथ ही आस -पास के दांतो के क्षय से ग्रस्त होने कि संभावना बढ़ जाती है|


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