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प्रकृति और हमारा स्वास्थ्य

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प्रकृति ने हमें जीवन दिया है और उसकी देखभाल प्रकृति स्वयं करती है और हमें भी स्वस्थ रहने के लिए सहयोग करना चाहिए। वो व्यक्ति हमेशा स्वस्थ रहता है, जो प्रकृति के नियमों का पालन करता है और प्रकृति की अवहेलना करने वाला व्यक्ति रोग से ग्रस्त हो जाता है। प्रकृति अपने यन्त्रों का उपयोग करके संचित मल जैसे (मल, मूल, श्वेद और कार्बन डाईआॅक्साईड) को निष्कासित करती है। शरीर में इनका संचित होना ही रोग का कारण होता है।

स्वस्थ शरीर के लक्षण:-

1. भोजन में रूचि रहना।

2. भोजन का बिना किसी बाधा से पाचन होना।

3. अपशिष्ट पदार्थों का शरीर से बाहर निकलना।

4. मन व इन्द्रियों का प्रसन्न रहना।

5. शरीर में हल्कापन रहना।

6. बल व आयु की वृद्धि होना।

7. मानसिक रूप से प्रसन्न रहना।



स्वस्थ रहने के नियम:-

1. सही समय पर सोना व जगना।

2. ऐसे स्थान पर सोना जहां पर हवा और प्रकाश का पूर्ण आवागमन हो।

3. प्रातः काल भ्रमण करना।

4. आसन, प्रणायाम, सूर्य नमस्कार को नियमित करना।

5. रोज मुंह और दांतों की सफाई करना।

6. खाने से पहले हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोना।

7. भोजन संतुलित और सुपाच्य होना चाहिए एवं अंकुरित अन्न पर्याप्त रहस्य प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट का शरीर की आवश्यकतानुसार पर्याप्त मात्रा होनी चाहिए।

8. भोजन खूब चबा-चबा कर खाना चाहिए, दिन में खूब पानी पीना चाहिए।

9. सप्ताह में एक बार उपवास अवश्य करना चाहिए।

10. ऋतु के अनुसार ही भोजन करना चाहिए।

11. भोजन करते समय अपने आमाश्य को चैथाई खाली रखना चाहिए।

12. भोजन के पूर्व पानी पीऐं तथा भोजन करते समय बीच-बीच में एक-एक घूंट पानी पीएंे, भोजन के तुरन्त बाद पानी कदायी नहीं पीऐं।

13. विरूद्ध आहार का सेवन नहीं करना चाहिए जैसे:- दूध और मछली, दही और आचार, दूध और दही, बराबर मात्रा में शहद और घी, उड़द और दही

14. शरीर व घर की सफाई का ध्यान अवश्य रखें।

15. खुद के साथ-साथ सामाजिक स्वास्थ्य का भी ध्यान रखना चाहिए।


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