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मधुमेह और प्राकृतिक चिकित्सा

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 जब हम खाना खाते हैं, तब उस खाने से ग्लूकोज़ का निर्माण होता है। यही ग्लूकोज़ हमारे शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है। इसी ग्लूकोज़ को शरीर की कोशिकाओं में पहुंचाने के लिए इंसुलिन एक चाबी की काम करता है। लेकिन शरीर में इंसुलिन की कमी होने से ग्लूकोज़ शरीर की कोशिकाओं में प्रवेश नहीं कर पाता और खून में इसकी मात्रा बढ़ने लगती है।

मधुमेह के कारण-

1. आरामदेह जीवनशैली व्यतीत करना 

2. खानपान की गलत आदतें 

3. धूम्रपान व शराब का सेवन 

4. अंग्रेजी दवाइओं के साइड-इफेक्ट्स 

5. शरीर में विषैले पदार्थों का इकट्ठा होना 

6. अनुवांशिक कारण 

7. मोटापा व मानसिक तनाव



प्राकृतिक चिकित्सा द्वारा उपचार-

1. आहार चिकित्सा – कुछ रस जैसे करेला, आंवला, एलोवेरा, गिलोय, जामुन आदि का रस सेवन करने से रक्त शकर्रा की मात्रा कम हो जाती है। आहार में कम कैलोरी, ज्यादा रेशे वाले अधिक प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों का उपयोग लाभदायक होता है।


2. जल चिकित्सा – इस विधि से शरीर की चया-अपचया की क्रिया ठीक होती है। तथा अग्नाशय से इंसुलिन का निर्माण ठीक से होने लग जाता है। इस चिकित्सा से हम भाप स्नान गर्म व शीतल जल स्नान, एनिमा आदि प्रयोग करते हैं। इन विधियों से रक्त शकर्रा नियंत्रित हो जाती है। तथा एनिमा के द्वारा आंतो में इकट्ठे विजातीय पदार्थों की सफाई हो जाती है।


3. मिट्टी चिकित्सा – इस विधि से शरीर की पाचन शक्ति ठीक से काम करने लगती है। पाचन-तंत्र का संतुलन ठीक हो जाता है तथा अंतस्रावी ग्रंथियां ठीक से कार्य करने लगती हैं। तथा शरीर में इकट्ठे विषैले पदार्थों को मिट्टी अपने अंदर सोख लेती है।


4. योग – योगिक क्रियाएं करने से मन को शांति मिलती है। मोटापा कम हो जाता है। अन्तस्रावी ग्रंथियां अपना काम ठीक प्रकार से करने लग जाती हैं। तथा साथ ही यकृंत अग्नाशय तथा पाचन तंत्र की कार्य प्रणाली भी ठीक हो जाती है, जिससे रक्त में शकर्रा की मात्रा भी ठीक हो जाती है।


निम्नलिखित योगिक क्रियाएं मधुमेह में लाभदायक होती हैं-

 पवन मुक्तासन, धनुर्सान, कटि चक्रासन, सूर्यनमस्कार, श्वासन आदि।


जीवनशैली में परिवर्तन अति आवश्यक है। हर व्यक्ति को उसकी दिनचर्या व्यवस्थित रखनी चाहिए जैसे प्रातःकालीन भ्रमण करना, व्यायाम करना, सही समय पर भोजन करना, आरामदेह जीवन का त्याग करना, शरीर का वजन नियंत्रित रखना, मानसिक तनाव से दूर रहना तथा खाने के तुरंत बाद पानी पीने से बचना चाहिए। 

Diabetes: Type I
Diabetes: Type II

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