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सिलिएक रोग से बचने के उपाय

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सिलिएक रोग छोटी आंत की बीमारी होती है यह एक स्‍वप्रतिरक्षी विकार है जो ग्‍लूटेन प्रोटीन की वजह से होता है जो कि गेंहू, जौ, राई, पारले, ओटस में पाया जाता है जब इन चीजों से बने भोज्‍य पदार्थ को हम खाते है तो ग्‍लूटेन हमारे शरीर में जाकर आंत की कार्यक्षमता को कम कर देता है जिससे आंते आहार से पोषक तत्‍व  को अवशोषित  नहीं कर पाती है जिसके फलस्‍वरूप हमारे शरीर में विटामिन एंव खनिज तत्‍वों की कमी हो जाती है।


सिलिएक रोग होने के कारण

वातावरण का प्रभाव 

आनुवंशिक गतिविधियां

कुछ बीमारियां जैसे – शुगर, अल्‍सरेटिव, कोलाइटस व तंत्रिका संबंधी विकार।


लक्षण 

वजन कम होना 

पेट दर्द व पेट फूलना 

चिडचिडापन व कमजोरी

हाथ पैरों में छनछनाहट 

अपच। 

ऐसे कुछ भोज्‍य पदार्थ जो सिलिएक रोग से ग्रसित व्‍यक्ति नहीं ले सकता या नहीं लेना चाहिए 

1.अनाज (गेंहू, जौ, राई, ओटस, पारले व इससे बनी चीजें)।

2.बाजार की चीजें – टॉफी, आइसक्रीम, चॉकलेट, बेंकिंग पाउडर, एनर्जी पाउडर, सूप आदि।


कुछ ऐसे भोज्‍य पदार्थ जो कि एक सिलिएक रोगी ले सकता है इस बीमारी से बचने के लिए घर की बनी चीजें ही उपयेाग में लें बाजार की सामग्री का उपयेाग न करें –

1.अनाज – साबूदाना, मक्‍का, चावल, बेसन, बाजरा, कुटटू का आटा, सिंघाडे का आटा आदि।

2.फल और सब्जियां।

3.दूध व दूध से बनी चीजें।

4.घर पर बनी मिठाईयां – बर्फी, रसगुल्‍ला, तिल का लडडू, गजक, हलवा आदि।

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