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ह्रदय रोगों से बचाव के आसान उपाय

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दिल से ही तो हमारी धड़कनें चलती हैं और उसी से हम जिंदा हैं इसलिए दिल की देखरेख बहुत जरूरी है। जरा सी भी अव्यवस्थित जीवनशैली और स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही आप के नाजुक दिल के लिए खतरा पैदा कर सकती है। बदलती लाइफ स्टाइल ने हमारे दिल के लिए खतरा बढ़ा दिया है। जीवनशैली व खानपान में बदलाव ने लोगों को हृदय संबंधी रोगों के करीब पहुंचा दिया है। हृदय रोग किसी भी उम्र में किसी को भी हो सकते हैं। ये रोग ऐसे होते हैं जिनका इलाज बहुत मुश्किल होता है। इसलिए हमें कोशिश करनी चाहिए कि हम शुरू से ही अपने हृदय की खास देखभाल करें और उसे स्वस्थ रखें।

हृदय को स्वस्थ रखने के लिए हमें अपने रोजमर्रा के जीवन में ही थोड़े बदलाव लाने की जरुरत होती है। अपने खानपान व जीवनशैली की आदतों में कुछ नई बातों को शामिल करने और कुछ खराब आदतों को निकाल देने से हमारे हृदय को फायदा होता है। आइये जानते हैं कि एक स्वस्थ्य हृदय के लिए क्या किया जाना चाहिए।

    • हृदय रोग (दिल की बीमारी) क्या है?

हृदय रोग आपके हृदय को प्रभावित करने वाली कई स्थितियों के बारे में बताता है। हृदय रोग में अंतर्गत आने वाले रोगों में रक्त वाहिका रोग, जैसे कोरोनरी धमनी रोग  हृदय के धड़कने में होने वाली समस्या  और जन्म से ही होने वाले हृदय दोष आदि आते हैं।
"हृदय रोग" को चिकित्सीय बाशा में अक्सर "कार्डियोवास्कुलर रोग" कहा जाता है। कार्डियोवास्कुलर रोग आम तौर पर उन स्थिति को संदर्भित करता है, जिनमें रक्त वाहिकाओं के संकुचित या अवरुद्ध होने की वजह से दिल का दौरा, एनजाइना  या स्ट्रोक आने का खतरा रहता है। हृदय की अन्य स्थितियों में आपके दिल की मांसपेशियों, वाल्व या हृदय धड़कनों का प्रभावित होना भी हृदय रोग का एक रूप माना जाता है।स्वस्थ जीवन शैली को अपनाकर कई प्रकार के हृदय रोगों को रोका या ठीक किया जा सकता है।

• इन कारणों बढ़ता हृदय रोग होने का ख़तरा


ह्रदय रोग के कारण उसके प्रकार पर निर्भर करते हैं।

1. कार्डियोवास्कुलर  रोग
कार्डियोवास्कुलर रोग विभिन्न हृदय या रक्त वाहिकाओं की समस्याओं के लिए उपयोग किया जा सकता है लेकिन अक्सर इसका प्रयोग एथेरोस्क्लेरोसिस  द्वारा आपके दिल या रक्त वाहिकाओं को हुए नुकसान के लिए किया जाता है। इसके निम्नलिखित कारण हो सकते हैं -

2. एक अस्वस्थ आहार

व्यायाम न करना
अधिक वजन होना
धूम्रपान
अनियमित दिल की धड़कन

3. जन्मजात हृदय का दोष
कोरोनरी धमनी रोग
हाई ब्लड प्रेशर
शुगर
धूम्रपान करना
शराब या कैफीन का अत्यधिक उपयोग
दवाओं का दुरुपयोग
तनाव
केमिस्ट पर मिलने वाली दवाएं और हर्बल उपचार।
हृदय वाल्व रोग
4. जन्मजात हृदय दोष
जन्मजात हृदय संबंधी दोष आमतौर पर तब विकसित होते हैं जब बच्चा गर्भ में होता है और उसका दिल विकसित होता है या गर्भधारण के एक महीने के बाद और जब रक्त का प्रवाह बदलता है। कुछ चिकित्सा समस्याएं, दवाएं और अनुवांशिक कारक ऐसे दोष पैदा करने में एक भूमिका निभा सकते हैं।

• हृदय की बीमारियों का समाधान ऐसे करे:-

अगर आप भी हृदय की बीमारियों से हैं तो आपको एक अच्छे हेल्थ एक्सपर्ट से परामर्श लेकर अपने हृदय  की जॉंच ज़रुर करवाना चाहिए । जिसके लिए आपको एक अच्छे एक्सपर्ट को तलाश ने जरुरत होगी, अब आपको परेशान होने की बिलकुल  जरूरत नहीं हैं , क्योंकि आपकी इस समस्या का हल भी आपको ऑनलाइन ही मिल जायेगा | यहाँ पर आपको आपके क्षेत्र के अनुसार एक अच्छे एक्सपर्ट की लिस्ट मिल जाएगी CLICK HERE l जिनसे आप ऑनलाइन या ऑफलाइन बातचीत कर सकते हैं, नीचे दिए गए उपायों को अपनाकर भी आप अपना वजन कम कर सकते हैं ।


• इन उपायों को अपना कर हृदय रोगों के खतरे को कम किया जा सकता   

1. तनाव मुक्त रहें



आजकल की जीवनशैली का एक हिस्सा तनाव बन गया है। दफ्तर हो या परिवार, इंसान किसी न किसी वजह से तनाव में घिरा रहता है। लेकिन, तनाव आपके हृदय के लिए बिल्कुल अच्छा नहीं। इसलिए तनाव मुक्त रहने की कोशिश करें। इससे आपको हृदय रोग को रोकने में मदद मिलेगी, क्योंकि तनाव हृदय की बीमारियों की मुख्य वजह है।

2. कोलेस्ट्रॉल पर नियंत्रण रखें




अपने कोलेस्ट्रॉल लेवल को 130 एमजी/ डीएल तक बनाए रखें। कोलेस्ट्रॉल के मुख्य स्रोत जीव उत्पाद हैं, इनसे जितना अधिक हो, बचने की कोशिश करनी चाहिए। अगर आपके यकृत यानी लीवर में अतिरिक्त कोलेस्ट्रॉल का निर्माण हो रहा हो तब आपको कोलेस्ट्रॉल घटाने वाली दवाओं का सेवन करना पड़ सकता है।


3. ब्लड प्रेशर को अनदेखा न करें



अपने ब्लड प्रेशर को 120/80 एमएमएचजी के आसपास रखें। ब्लड प्रेशर विशेष रूप से 130/ 90 से ऊपर आपके ब्लॉकेज (अवरोध) को दुगनी रफ्तार से बढ़ाएगा। इसको कम करने के लिए खाने में नमक का कम इस्तेमाल करें और जरुरत पड़े तो हल्की दवाएं लेकर भी ब्लड प्रेशर को कम किया जा सकता है।


4. वजन सामान्य रखें



हृदय को स्वस्थ बनाने के लिए जरूरी है कि शरीर के वजन को सामान्य रखें। आपका बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) 25 से नीचे रहना चाहिए। इसकी गणना आप अपने किलोग्राम वजन को मीटर में अपने कद के स्क्वेयर के साथ घटाकर कर सकते हैं। तेल के परहेज और निम्न रेशे वाले अनाजों तथा उच्च किस्म के सलादों के सेवन द्वारा आप अपने वजन को नियंत्रित कर सकते हैं।

4. टहलें



रोज आधे घंटे तक जरूर टहलें। टहलने की रफ्तार इतनी होनी चाहिए कि जिससे सीने में दर्द न हो और आप हांफने भी न लगें। यह आपके अच्छे कोलेस्ट्रॉल यानी एचडीएल कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने में आपकी मदद कर सकता है। आप सुबह, शाम या फिर रात को खाने के बाद किसी भी वक्त टहल सकते हैं।


5. व्यायाम करें



रोज 15 मिनट तक ध्यान और हल्के योग व्यायाम रोज करें। यह आपके तनाव तथा रक्त दबाव को कम करेगा। आपको सक्रिय रखेगा और आपके हृदय रोग को नियंत्रित करने में मददगार होगा। व्यायाम करने से न सिर्फ आपका हृदय बल्कि संपूर्ण शरीर चुस्त-दुरुस्त महसूस करने लगेगा।


6. रेशेदार भोजन करें



स्वस्थ हृदय के लिए रेशेदार भोजन का सेवन करें। भोजन में अधिक सलाद, सब्जियों तथा फलों का प्रयोग करें। ये आपके भोजन में रेशे और एंटी ऑक्सीडेंट्स के स्रोत हैं और एचडीएल या गुड कोलेस्ट्रोल को बढ़ाने में सहायक होते हैं। इससे आपकी पाचन क्षमता भी अच्छी बनी रहती है।

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