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महुआ है रोगों की बेहतरीन औषिधि

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महुआ (Mahua) भारत के कई प्रांतों में पाया जाता है. महुआ (Mahua) का वृक्ष काफी लम्बा चौड़ा होता है. गुजरात में ये बहुत ज्यादा होता है. इसके पत्ते बादाम के पत्तों की तरह होते हैं. पत्तों के मोटे और चौड़े होने के कारण इन की पत्तल बनाई जाती हैं.

महुआ (Mahua) की लकड़ी बहुत ही मजबूत होती है. इस कारण इसका प्रयोग ईमारत बनाने और फर्नीचर बनाने में किया जाता है. इसके फल सफेद होते हैं. इनका आकर बादाम से थोड़ा सा छोटा होता है. कई जगह इसके फूलों और फलों को खाने के काम में लाया जाता है. इसके फूलों और फलों में एक मादक खुशबू होती है और इसका फल भी बहुत ज्यादा मीठा होता है.

गठिया होने पर
महुए के फूल को बकरी के दूध में पका कर खाने से बहुत लाभ होता है.
धातु पुष्ट
महुए  की छाल को गाय के घी और शक्कर के साथ मिला कर दिन में तीन बार पीने से धातु पुष्ट होती है.
सांप के काटने पर
महुए के बीज को पीस कर काटे हुए स्थान पर लगाने और आखों के दोनों कोरों पर लगाने से जहर का  असर कम हो जाता है.
महुआ वातनाशक
महुआ वातनाशक और पौष्टिक तत्व वाला होता है.
सूजन कम होती है
यदि जोड़ों पर इसका लेपन किया जाय तो सूजन कम होती है और दर्द खत्म होता है.
पेट की बीमारियों से मुक्ति
इससे पेट की बीमारियों से मुक्ति मिलती है.
ग्रामीण क्षेत्रों में महुआ जैसे बहुपयोगी वृक्षों की संख्या घटती जा रही है. जहां इसकी लकड़ी को मजबूत एवं चिरस्थायी मानकर दरवाजे, खिड़की में उपयोग होता है. वहीं इस समय टपकने वाला पीला फूल कई औषधीय गुण समेटे है. इसके फल को ‘मोइया’ कहते हैं, जिसका बीज सुखाकर उसमें से तेल निकाला जाता है. जिसका उपयोग खाने में लाभदायक होता है.
ज्यादा दवा के उपयोग से आपके लक्षणों में सुधार नहीं होगा, बल्कि इससे विषाक्तता या गंभीर दुष्प्रभाव हो सकते हैं। यदि आपको लगता है कि आपने या किसी और ने Mahua (महुआ) की ज्यादा खुराक ले ली है तो कृपया अपने नजदीकी अस्पताल या नर्सिंग होम के आपातकालीन विभाग में जाएँ। आवश्यक जानकारी पाने में चिकित्सकों की सहायता करने के लिए अपने साथ मेडिसिन बॉक्स, कंटेनर या लेबल ले जाएँ।
यदि आपको पता है कि किसी व्यक्ति की स्थिति आपके समान है या यदि ऐसा प्रतीत होता है कि उनकी बीमारी आपके जैसी है तो भी कभी अपनी दवाएं दूसरे लोगों को ना दें। इसकी वजह से दवा की अधिमात्रा हो सकती है।
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