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बेर खाने के गुण फायदे

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बेर एक ऐसा फलदार पेड़़ है जो कि एक बार पूरक सिंचाई से स्थापित होने के पश्चात वर्षा के पानी पर निर्भर रहकर भी फलोत्पादन कर सकता है। यह एक बहुवर्षीय व बहुउपयोगी फलदार पेड़ है जिसमें फलों के अतिरिक्त पेड़ के अन्य भागों का भी आर्थिक महत्व है। शुष्क क्षेत्रों में बार-बार अकाल की स्थिति से निपटने के लिए भी बेर की बागवानी अति उपयोगी सिद्ध हो सकती है। इसकी पत्तियाँ पशुओं के लिए पौष्टिक चारा प्रदान करती है जबकि इसमें प्रतिवर्ष अनिवार्य रूप से की जाने वाली कटाई-छंटाई से प्राप्त कांटेदार झाड़ियां खेतों व ढ़ाणियों की रक्षात्मक बाड़ बनाने व भण्डारित चारे की सुरक्षा के लिए उपयोगी है।

बेर खेती ऊष्ण व उपोष्ण जलवायु में आसानी से की जा सकती है क्योंकि इसमें कम पानी व सूखे से लड़ने की विशेष क्षमता होती है बेर में वानस्पतिक बढ़वार वर्षा ऋतु के दौरान व फूल वर्षा ऋतु के आखिर में आते है तथा फल वर्षा की भूमिगत नमी के कम होने तथा तापमान बढ़ने से पहले ही पक जाते है। गर्मियों में पौधे सुषुप्तावस्था में प्रवेश कर जाते है व उस समय पत्तियाँ अपने आप ही झड़ जाती है तब पानी की आवश्यकता नहीं के बराबर होती है। इस तरह बेर अधिक तापमान तो सहन कर लेता है लेकिन शीत ऋतु में पड़ने वाले पाले के प्रति अति संवेदनशील होता है। अतः ऐसे क्षेत्रों में जहां नियमित रूप से पाला पड़ने की सम्भावना रहती है, इसकी खेती नहीं करनी चाहिए।

1. रसीले बेर में कैंसर कोशिकाओं को पनपने से रोकने का गुण पाया जाता है.
2. अगर आप वजन कम करने के उपाय खोज रहे हैं तो बेर आपके लिए एक अच्छा विकल्प है. इसमें कैलोरी न के बराबर होती है.
3. बेर में पर्याप्त मात्रा में विटामिन सी, विटामिन ए और पोटैशियम पाया जाता है. ये रोग प्रतिरक्षा तंत्र को बेहतर बनाने का काम करता है.
4. बेर एंटी-ऑक्सीडेंट्स का खजाना है. लीवर से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए भी यह एक फायदेमंद विकल्प है.
5. बेर खाने से त्वचा की चमक लंबे समय तक बरकरार रहती है. इसमें एंटी-एजिंग एजेंट भी पाया जाता है.
6. अगर आप कब्ज की समस्या से जूझ रहे हैं तो बेर खाना आपको फायदा पहुंचा सकता है. यह पाचन क्रिया को बेहतर बनाने में मदद करता है.
7. बेर में पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम और फाॅस्फोरस पाया जाता है. यह दांतों और हड्ड‍ियों को मजबूत बनाता है.

बेर का स्वाद खट्टा तथा मीठा होता हैं. अधिक मीठे बेरों में गुणों की संख्या भी अधिक होती हैं. मीठे बेर को खाने से शरीर की ताकत में वृद्धि होती हैं, रक्त शुद्ध होता हैं तथा प्यास बुझती हैं. खट्टे बेरों को खाने से खांसी होती हैं. पके हुए बेरों को खाने से बहुत सी बिमारियां ठीक हो जाती हैं. जैसे – अतिसार, रक्तदोष, श्रम तथा शोष आदि. पके बेर मधुर, उष्ण, कफ नाशक, पाचक तथा रुचिकर होता हैं. बेर की तासीर ठंडी होती हैं. इसलिए यह पित्त को नष्ट करने के लिए उपयोगी होता हैं.

बेर में फास्फोरस की कुछ मात्रा विद्यमान होती हैं. इसलिए इसे खाने से शरीर और दिमाग मजबूत होता हैं. बेर का सेवन करने से बाल तथा शरीर की हड्डियाँ भी मजबूत होती हैं. बेर को खाने से व्यक्ति की भूख बढती हैं. इसे खाने से मर्दाना ताकत भी बढती हैं, आँखों की रौशनी के लिए भी यह बहुत ही उपयोगी होता हैं. बेर का इस्तेमाल करने से पाचन तंत्र के आंत के कीड़े भी नष्ट हो जाते हैं. खून के दस्तों से राहत पाने के लिए भी यह बेहद उपयोगी होता हैं. इसे खाने से वमन की शिकायत भी दूर हो जाती हैं. यदि बेर के पेड़ के पत्तों को गिलटी पर लगाया जाये तो गिलटी कुछ ही समय में पक जाती हैं और व्यक्ति को गिलटी के रोग से छुटकारा मिल जाता हैं.

आयुर्वेदानुसार हमेशा मीठे और पके हुए बेरों का ही सेवन करना चाहिए. बेर खाने के तुरंत बाद कभी – भी पानी नहीं पीना चाहिए. क्योंकि बेर खाने के तुरंत बाद पानी पीने से बेर के लाभकारी तासीर का प्रभाव शरीर पर नहीं होता तथा बेर को पचने में भी समय लगता

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