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डेंगू में प्राकृतिक चिकित्सा एवं आहार

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Manoj Sharma

डेंगू बुखार को बे्रक बोन फीवर, हड्डी तोड़ बुखार, तथा दण्डक ज्वर के नाम से जाना जाता है। यह संक्रामंक होता है ,जो एक विषाणु जनित रोग होता है। इस विषाणु का प्रधान वाहक ईडिस इजिप्टी नामक मच्छर होता है। इसमें बुखार अचानक चढ़ता है और प्रायः 8 दिन तक रहता है।


इसमें शरीर में दण्डे के मारने के समान पीड़ा होती है। त्वचा लाल हो जाती है और चकते हो जाते हैं। इसमें रोगी की शक्ति अत्यन्त क्षीण हो जाती है, जिससे चलने-फिरने में असमर्थ हो जाता है। इसमें हाथ-पैर, पीठ व जोड़ो में, कमर में बहुत तेज दर्द होता है तथा गले में खराश होती है। उल्टी, जी मिचलना बना रहता है तथा बुखार तेज होने पर नाड़ी की गति धीमी हो जाती है। कभी-कभी ज्वर उतरने के साथ दस्त व रक्त स्त्राव भी होने लगता है। इस रोग में रक्त में प्लेटलेट्स कम हो जाती है, जिससे रक्त स्त्राव हो जाता है।

सामान्य व प्राकृतिक उपचार-

1. रोगी को एक सप्ताह पूर्ण विश्राम करना चाहिए।

2. स्वच्छता का पूर्ण ध्यान रखना चाहिए।

3. निवास स्थल हवा व धूप युक्त होना चाहिए।

4. पेट साफ रखना चाहिए।

5. उल्टी होने पर लौंग व ईलायची चुसनी चाहिए तथा सौंफ का पानी पीना चाहिए।

6. ज्यादा से ज्यादा तरल पदार्थ पीने चाहिए, जैसे-लस्सी, छाछ, नारियल पानी, ग्लुकोज का पानी, दाल पानी, दूध आदि।

7. बुखार तेज हो तो, ठण्डे पानी का तौलिया सिर पर रखना चाहिए।

8. आंखों में दर्द हो तो बर्फ का सेक करना चाहिए।

9. ठण्डे पानी का एनिमा लगाना चाहिए।

10. नीम के तेल मलीश के लिए काम में लेना चाहिए।

11. गिलोय, ग्वार पाठा, तुलसी को पानी उबालकर बार-बार पीना चाहिए।

12 किवी फल का उपयोग करना चाहिए।


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