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शीर्षासन करने का तरीका, फायदे और सावधानियां

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By KayaWell Expert
Useful for   
Anxiety
Depression
Headache
Insomnia
Migraine
Stress
Yoga
How This Helps   


शीर्षासन संस्कृत के दो शब्दों शीर्ष और आसन से मिलकर बना है। जहां शीर्ष का अर्थ सिर  और आसन का अर्थ मुद्रा है। शीर्षासन का अभ्यास सिर नीचे और पैर ऊपर उठकार किसा जाता है इसलिए इसे अंग्रेजी में हेड स्टैंड पोज  कहा जाता है। आमतौर पर सभी लोगों को मालूम है कि सिरदर्द के इलाज में शीर्षासन बहुत फायदेमंद होता है। यही कारण है कि अक्सर हम एक दूसरे को शीर्षासन करने की सलाह (tips) देते हैं। चूंकि इस आसन का अभ्यास करते समय शरीर को उल्टा करना पड़ता है, अर्थात् सिर को जमीन पर टिकाकर बैलेंस बनाना होता है, इस क्रिया में मस्तिष्क में खून का बेहतर तरीके से प्रवाह होता है जिससे यह मस्तिष्क से जुड़ी सभी बीमारियों  के लिए फायदेमंद होता है। महिलाएं गर्भावस्था के अलावा किसी भी समय शीर्षासन का अभ्यास कर सकती हैं।


  • • शीर्षासन करने का तरीका – 

  • शीर्षासन को बहुत सामान्य और बेहद आसान आसन माना जाता है लेकिन यह उतना ही कठिन भी होता है। इस आसन का अभ्यास करने के लिए जमीन पर सिर टिकाकर पूरे शरीर का संतुलन बनाने आना चाहिए अन्यथा आप इसका अभ्यास नहीं कर पाएंगे। आइये जानते हैं शीर्षासन करने का सही तरीका क्या है।

  • सबसे पहले वज्रासन मुद्रा में घुटनों पर बैठ जाएं और अपने दोनों हाथों की उंगलियों रो इंटरलॉक कर लें और उन्हें जमीन पर बिछी चटाई पर रखें।
  • उंगलियों को इंटरलॉक करने के बाद हथेली को कटोरी के आकार में मोड़ें और धीरे (slowly) से अपने सिर को झुकाकर हथेली (palm) पर रखें।
  • इसके बाद धीरे-धीरे अपने दोनों पैरों को ऊपर उठाएं और एकदम सीधे रखें। पैरों को ऊपर उठाने के लिए आप शुरूआत में दीवार या किसी व्यक्ति का सहारा ले सकते हैं।
  • इस दौरान नीचे से ऊपर तक पूरा शरीर बिल्कुल सीधा होना चाहिए। शरीर का संतुलन अच्छी तरह से बनाए रखें।
  • इस मुद्रा में आने के बाद 15 से 20 सेकेंड तक गहरी सांस लें और कुछ देर तक इसी मुद्रा में बने रहें।
  • अब धीरे-धीरे सांस छोड़ें और और पैरों को नीचे नीचे जमीन पर वापस लाएं।
  • इस आसन को तीन से चार बार दोहराएं।
  • इस बात का ध्यान रखें कि शीर्षासन का अभ्यास तड़के सुबह करें। अभ्यास के दौरान पेट बिल्कुल खाली होना चाहिए तभी यह आसन सही तरीके से हो पाएगा।

  •  यह एक योगासन जो ठीक करता है, कमजोर दिमाग, झड़ते बाल और दिल की बीमारियों को
  • • शीर्षासन के फायदे –

  • शीर्षासन एक ऐसा आसन है जिसका प्रतिदिन खाली पेट अभ्यास करने से शरीर के विभिन्न विकार दूर हो जाते हैं। यह आसन सिरदर्द की समस्या, नींद की समस्या, लिवर और किडनी के रोगों को दूर करने के साथ ही शरीर की मांसपेशियों को मजबूत बनाने में मदद करता है। इसके अलावा भी इस आसन के विभिन्न फायदे हैं। आइये जानते हैं उन फायदों के बारे में।

  • • स्ट्रेस दूर करने में शीर्षासन के फायदे –

  • शीर्षासन का प्रतिदिन अभ्यास करने से चिंता, तनाव, डर दूर हो जाता है और मन में बुरे एवं नकारात्मक विचार नहीं आते हैं। इस आसन का अभ्यास करते समय धीरे-धीरे गहरी सांस लेते रहने से आपका तनाव कब दूर हो जाएगा आपको पता नहीं चलेगा।


                    • 1. शीर्षासन के फायदे एकाग्रता बढ़ाने में – 
                • जब आप जमीन पर उल्टा होकर शीर्षासन का अभ्यास करते हैं तो मस्तिष्क में खून का प्रवाह  बढ़ता है, जिसके कारण मस्तिष्क की क्रियाएं बेहतर होती हैं और एकाग्रता बढ़ती है। इसके अलावा शीर्षासन करने से दिमाग और यादाश्त तेज होती है।

            • 2. आंखों के लिए फायदेमंद शीर्षासन – 
            • जब आप सिर के बल उल्टा होकर शरीर का संतुलन बनाते हैं तो सिर में अतिरिक्त ऑक्सीजन, पोषक पदार्थ युक्त खून पहुंचता है जो कि आंखों की कोशिकाओं को भी मजबूत बनाने में मदद करता है। इसलिए आंखों की विभिन्न बीमारियों से छुटकारा पाने के लिए शीर्षासन फायदेमंद माना जाता है।

            • 3. शीर्षासन के लाभ सिर में खून का प्रवाह बढ़ाने में –
            • शीर्षासन एक ऐसा योग मुद्रा है जिसका प्रतिदिन अभ्यास करने से सिर में सही तरीके से खून का प्रवाह होता है। यह आसन सिर की त्वचा में अतिरिक्त पोषण और ऑक्सीजन पहुंचाने का कार्य करता है और हेयर फॉलिकल को भी पोषण प्रदान करता है जिससे सिर दर्द दूर होता है बाल झड़ने की समस्या खत्म हो जाती है।

            •  4. कंधों एवं भुजाओं को मजबूत बनाने में शीर्षासन करने के फायदे –
            • जब सिर के बल खड़े होकर आप शीर्षासन का अभ्यास करते हैं तो इससे भुजाएं और कंधों में मजबूती  आती है। इसके अलावा सिर, गर्दन एवं पीठ की मांसपेशियां भी मजबूत होती है। यह आसन सिर के ऊपरी हिस्से को टोन करने और मजबूत बनाने में मदद करता है।

            • 5. शीर्षासन के फायदे पाचन सुधारने में – 
            • प्रतिदिन सही तरीके से शीर्षासन का अभ्यास करने से पेट की गैस बाहर निकलता है और पाचन अंगों में खून का प्रवाह बेहतर होता है। इससे पाचन तंत्र पोषक पदार्थों का अवशोषण बेहतर तरीके से करता है। कब्ज की समस्या को दूर करने में यह आसन बहुत फायदेमंद होता है।

            • 6. शीर्षासन करने के फायदे लिवर को मजबूत बनाने में – 
            • यदि आपका लिवर कमजोर है तो आपको प्रतिदिन सुबह शीर्षासन का अभ्यास करना चाहिए क्योंकि यह आसन लिवर को मजबूत बनाने के साथ ही लिवर से जुड़ी बीमारियों एवं ब्लड सर्कुलेशन की समस्या को भी दूर करने में मदद करता है।

                        • 7. सिर दर्द दूर करने में शीर्षासन के फायदे – 
                                • प्रतिदिन सुबह शांत वातावरण में शीर्षासन का अभ्यास करने से दिमाग शांत रहता है और चिंता, तनाव, सिरदर्द, डिप्रेशन एवं माइग्रेन की समस्या दूर हो जाती है। यह आसन यादाश्त बढ़ाने में भी मदद करता है। यदि आप नींद न आने की समस्या (Insomnia) से पीड़ित हैं तो शीर्षासन करने से यह समस्या पूरी तरह दूर हो जाती है।

                            • यह एक योगासन जो ठीक करता है, कमजोर दिमाग, झड़ते बाल और दिल की बीमारियों को

  • • शीर्षासन कितनी देर तक करें – 
  • शीर्षासन के अभ्यास की अवधि हर व्यक्ति के लिए अलग-अलग होती है। शुरूआत में करीब 30 सेकेंड तक शीर्षासन का अभ्यास करना चाहिए। लेकिन सामान्य रूप से 1 मिनट से 5 मिनट तक शीर्षासन का अभ्यास किया जा सकता है। अगर कोई व्यक्ति कई वर्षों से लगातार शीर्षासन का अभ्यास कर रहा हो तो वह 30 मिनट तक शीर्षासन का अभ्यास कर सकता है। शुरूआत में जो लोग 30 सेकेंड इस आसन का अभ्यास करते हैं वे कुछ दिनों बाद इस आसन के अभ्यास की अवधि (duration) बढ़ाकर 5 मिनट कर सकते हैं।

  • • निम्न सावधानियां शीर्षासन करते समय बरतें –

> यदि आपको उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, सेरेब्रल या कोरोनरी थ्रॉम्बोसिस एवं ग्लूकोमा  की समस्या है तो शीर्षासन का अभ्यास न करें।

> सिर में ब्लड हेमरेज की समस्या, किडनी का रोग और स्लिप डिस्क की समस्या हो तो इस आसन का अभ्यास (practice) करने से बचें।

> यदि आपका पेट पूरी तरह से भरा (full stomach) हो, शरीर में थकान हो, सिर दर्द या माइग्रेन की समस्या हो  तो इस आसन का अभ्यास न करें।

> शीर्षासन  का अंतिम मुद्रा में शरीर को उर्ध्वाधर रखें और पीछे या आगे की ओर न झुकाएं अन्यथा शरीर का बैलेंस बिगड़ सकता है और आपको चोट भी लग सकती है।

> यदि आपके शरीर में अशुद्ध खून (impure blood) हो तो इस आसन का अभ्यास न करें अन्यथा अशुद्धियां मस्तिष्क में भी पहुंच सकती हैं।

> महिलाओं को मासिक धर्म और गर्भावस्था के दौरान शीर्षासन का अभ्यास नहीं करना चाहिए।

> यदि आपको चक्कर आ रहा हो, सिर में चोट लगी हो या तेज सिर दर्द हो रहा हो तो शीर्षासन का अभ्यास न करें।

> यदि गर्दन में चोट लगी हो तो शीर्षासन का अभ्यास न करें। इसके अलावा हार्निया , हाइपरटेंशन और मोटापे की समस्या  से पीड़ित व्यक्तियों को भी इस आसन का अभ्यास नहीं करना चाहिए।

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