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हल्दी के औषधीय गुण

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हल्दी के औषधीय गुण
हल्दी का उपयोग व औषधीय गुण
By Research Staff
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हल्दी जिसको Turmeric (Curcuma Longa) कहा जाता है यह पीसकर सब्जियों में मसाले के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। हल्दी अपने गुणकारी रासायनिक तत्वों के कारण औषधि के समान लाभदायक होती है। हल्दी में खून साफ़ करने और सूजन को ठीक करने के मजबूत गुणकारी तत्व होते हैं। अधिकांश परिवारों में सूखी हल्दी का इस्तेमाल किया जाता है। वैसे कच्ची हल्दी भी बहुत गुणकारी होती है। आयुर्वेद चिकित्सा के अनुसार हल्दी तिक्त, उष्ण, रक्तशोधक, शोथनाशक और वायु विकारों को नष्ट करने वाली होती है। हल्दी की तासीर गर्म होती हैं | हल्दी के सेवन से पेट में छिपे जीवाणु नष्ट होते हैं। हल्दी Penicillin तथा Streptomycin की तरह ही कीटाणुनाशक है। वात, पित्त, कफ के विकारों में हल्दी से फायदा  होता है

आधी चम्मच हल्दी को थोड़ा भूनकर शहद से लेने से गला बैठना या खांसी में तुरन्त लाभ होता है।
हल्दी और मिसरी को पीसकर शहद में मिलाकर सेवन करने से ठंड से होने वाले छोटे-मोटे रोग ठीक हो जाते हैं |
हल्दी का चूर्ण, आंवले का रस 10 ग्राम और शहद मिलाकर प्रतिदिन सुबह-शाम सेवन करने से खांसी ठीक होती है।
दूध हल्दी और शहद – हल्दी और शहद से लाभ उठाने के लिए एक चम्मच पिसी हुई कच्ची हल्दी, एक गिलास गर्म दूध में मिलाकर पीने से शरीर में कहीं भी दर्द हो, कमर दर्द, सिरदर्द हो, ठीक हो जाता है। दूध में चीनी नहीं डालें। फीका या शहद मिलाकर दूध पियें।
यदि कहीं कट या जल जाए तो हल्दी के पाउडर को लगाने से खून का बहना बन्द हो जाता है। त्वचा जलने पर फफोला भी नहीं पड़ता है।
सोने से पहले हल्दी दूध लाभ : एक चम्मच हल्दी को एक गिलास गर्म दूध के साथ पीने से हड्डियाँ मजबूत रहती है और अस्थमा भी कंट्रोल में रहता हैं |
सोने से पहले हल्दी दूध पीने से जोड़ो में दर्द से छुटकारा मिलता है जोड़ो की सूजन और मांसपेशियों की ऐंठन भी कम हो जाती हैं |
शरीर में कहीं मोच आ जाए तो एक मोटी रोटी बनाकर, उस पर सरसों का तेल व हल्दी डालकर, गर्म रोटी को मोच वाले स्थान पर बाँधने से सूजन व मोच में तुरन्त फायदा होता है।
कच्ची हल्दी के रस का सेवन करने से आंत्रकृमि (पेट के कीड़े) जल्दी नष्ट होते हैं।
हल्दी के चूर्ण को पानी में मिलाकर फोड़े-फुसियां और जख्म धोने से बहुत लाभ होता है | यह एक हर्बल antiseptic होता हैं |
हल्दी के रस का प्रतिदिन सेवन करने से कुष्ठ रोग में बहुत लाभ होता है।
हल्दी का चूर्ण 3 ग्राम और सेंधा नमक 2 ग्राम मात्रा में मिलाकर हल्के गर्म जल से लेने से पेट की गैस से मुक्ति मिलती हैं |
हल्दी के साथ काली मुनक्का, इन दोनों को मिलाकर लेने से भी गैस की समस्या, पेट में जलन, खट्टी डकारें, एसिडिटी से निजात मिलती हैं | Acidity होने के कारण, लक्षण तथा घरेलू उपचार
उबले हुए दूध के साथ 2-3 ग्राम हल्दी के चूर्ण सेवन करने से जुकाम ठीक होता है। हल्दी और दूध का संयोग कई बीमारियों के उपचार के काम आता हैं |
कच्ची हल्दी के रस में चुकंदर के पत्तों का रस मिलाकर सिर में लगाने से बाल सुंदर व् आकर्षक घने हो जाते हैं |
ग्वारपाठे (एलोवेरा) के गूदे के साथ हल्दी को पीसकर अर्श रोग (Piles) में मस्सों पर लेप करने से आराम मिलता हैं।
हल्दी और मेथी के दानों का चूर्ण सुबह पानी के साथ सेवन करने से मधुमेह रोग में बहुत फायदा होता है।
ग्वारपाठे के गूदे के साथ हल्दी को पीसकर स्तनों पर लेप करने से स्तनों की जलन, सूजन ठीक होती है।
गठिया होने पर हल्दी के लड्डू खाने से फायदा होता है।  एलोवेरा के नुस्खे : दाद, खुजली, घाव, फोड़े-फुंसियों और जली त्वचा के लिए
आधी चम्मच हल्दी, एक चम्मच पिसा हुआ आंवला मिलाकर गर्म पानी के साथ लेने से खून साफ होता है। हल्दी रक्त साफ करती है।
1 चम्मच हल्दी के पाउडर को प्रतिदिन 1 गिलास गुनगुने दूध के साथ पीने से शरीर की रोग प्रतिरोधक- क्षमता बढती है। सर्दी, जुकाम आदि नहीं होते। शरीर के दर्द, चोट व पीड़ा में भी फायदा होता है।
मुंह में छाले होने पर गुनगुने पानी में हल्दी मिलाकर कुल्ला करने से आराम मिलता हैं |
हल्दी, नमक में थोड़ा सा सरसों के तेल को मिलाकर अंगुली से प्रतिदिन मसूड़ों की मालिश करना पायरिया, मुंह की बदबू व दांतों के रोग में अत्यन्त लाभकारी है।
2 चम्मच हल्दी, आधा किलो बिना मलाई वाले दही में मिलाकर दिन में 3 बार खायें। पीलिया की बीमारी में लाभ होता हैं ।
1 गिलास गर्म दूध में 1 चम्मच हल्दी, 10 काली मिर्चों का पाउडर मिलाकर सुबह-शाम पियें। ठंड लगकर आने वाला Fever, गला बैठना आदि बीमारी ठीक हो जाएगी।
फ़ूड पोइजनिंग से उलटी-दस्त होने पर, 1 चम्मच हल्दी, 1 कप पानी में घोलकर, रोजाना 2 बार पीने से पेट के रोग ठीक हो जाते हैं। पुराने दस्तों में 1 चम्मच हल्दी, 1 कप छाछ में घोलकर रोजाना 2 बार कुछ सप्ताह पीने से फायदा होता है।
हल्दी का सेवन कम मात्रा में शुरू करते हुए धीरे-धीरे मात्रा बढ़ाते जायें और लम्बे समय तक सेवन करते रहें। 1 या 2 चम्मच हल्दी से अधिक एक बार में सेवन नहीं करें। हल्दी का सेवन पानी या दूध से करें। बाह्य लेप और आन्तरिक सेवन दोनों प्रकार से प्रयोग करने पर शीघ्र लाभ होता है। हृदय रोगी हल्दी का प्रयोग कम-से-कम करें। गर्भवती महिला हल्दी को दूध या पानी के साथ बिलकुल सेवन ना करें | दर्द में आमी हल्दी अधिक लाभ करती है। यदि यह उपलब्ध नहीं हो तो रसोई में मौजूद हल्दी का प्रयोग करें। हल्दी दूध के फायदे बहुत है अगर आप इनको सही ढंग से नियमित रूप से प्रयोग करें तो |
खून की कमी दूर करने के लिए हल्दी के गुणों का बहुत महत्त्व है क्योंकि हल्दी में लौह तत्व होता है। दो चम्मच कच्ची हल्दी के रस में दो चम्मच शहद, चौथाई कप पानी को मिलाकर रोजाना दो बार पियें।
आधा चम्मच हल्दी के पाउडर को गर्म दूध से दिन में दो बार पीने से जब तक प्लास्टर रहे, सेवन करते रहने से हड्डी जुड़ जाती है।
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